प्रत्येक खगोलीय पिण्ड जिनका प्रभाव पृथ्वी पर पड़ता है उन्हें ग्रह की संज्ञा दी गयी। ब्रह्मांण्ड और हमारी पृथ्वी के मध्य सम्बन्ध के संदर्भ में कहा गया है-
'यत् पिण्डे तत् ब्रह्मांडे '
अर्थात् ब्रह्मांण्ड की गतिविधियों का हम पर प्रभाव पड़ता है। इस बात को इस तरह से समझा जा सकता है जिस प्रकार सूर्य उदित और अस्त होने का प्रत्यक्ष प्रभाव पृथ्वी पर तथा समस्त जीव-जन्तु और वनस्पतियों पर भिन्न-भिन्न प्रकार से पड़ता है उसी प्रकार अन्य सभी ग्रहों का भी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष प्रभाव पृथ्वी पर पड़ता है। प्रत्येक ग्रह किसी न किसी तत्त्व, गुण, दिशा, ऋतु, अंग आदि का प्रतिनिधित्व करता है।
सूर्य का प्रभाव ज्योतिष में समझने के लिए सर्वप्रथम सूर्य के गुणों को समझना आवश्यक है।
"यच्चक्षुरेषु सविता सकल ग्रहाणं राजा
समस्तसुरमूर्त्तिरशेषतेजाः"
सूर्य जो की समस्त ग्रहों के राजा हैं, अन्नत प्रभा के धनी हैं, तथा शुद्ध आत्मा की छवि एवं सृष्टि के नेत्र हैं
सूर्य जीवन प्रदाता है। सूर्य के बिना जीवन की कल्पना भी असंभव है। इसी प्रकार आत्मा के बिना जीवन संभव नहीं है। अतः सूर्य आत्मा का कारक है। वेदों में सूर्य को सौरमंडल की आत्मा कहा गया है
'सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च'
सूर्य से हमें प्रकाश मिलता है। हमारे शरीर में प्रकाशमय अंग नेत्र हैं। सूर्य हमारी आँखों को भी प्रदर्शित करता है। सूर्य के प्रकाश से समस्त जीव और वनस्पति का पालन पोषण होता है। सूर्य को नवग्रहों का देवता कहा गया है तथा सूर्य सरंक्षणकर्ता भी है अतः सूर्य पिता तथा पिता तुल्य व्यक्तियों को प्रदर्शित करता है।
सूर्य केंद्र में स्थित है जो अन्य सभी ग्रहों को अपने गुरुत्वाकर्षण बल से बांधकर रखता है जैसा कि वेदों में कहा गया है-
अर्थात् जिस प्रकार प्रशिक्षक अप्रशिक्षित अश्व को उसकी लगाम पकड़ कर अपने चारों और घुमाता है उसी प्रकार सूर्य अपने आकर्षण बल से पृथ्वी तथा अन्य समस्त ग्रहों को अपने चारों और घुमाता है।
अस्थियां सम्पूर्ण शरीर का प्रधान तत्त्व हैं अतः सूर्य अस्थियों का भी प्रतिनिधित्व करता है। सभी ग्रह सूर्य की उसी प्रकार परिक्रमा करते हैं जिस प्रकार किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के सेवक तथा अधीनस्थ व्यक्ति उसके इर्दगिर्द रहते हैं । अतः सूर्य उच्च पदों को प्रदर्शित करता है। ऐसा कार्य या व्यवसाय जिस में प्रतिष्ठा, सम्मान, अधिकार, शक्त्ति, नेतृत्व आदि हों सूर्य ग्रह उनका कारक है। जैसे कि अधिकारी, मंत्री, सरकार में उच्च पदाधिकारी, कंपनी के उच्च अधिकारी आदि।
सूर्य पुरुष ग्रह है जो की सात्त्विक गुणों से पूर्ण है। सूर्य अग्नि तत्व है तथा वर्ण से क्षत्रिय है। सूर्य 'अहं' का कारक है। सूर्य पथप्रदर्शक ज्योति है।
सूर्य निम्न वस्तुओं का भी स्वामी है -
रंग - लाल
दिशा - पूर्व
ऋतु - ग्रीष्म
धातु - सोना तथा पीतल
भोजन - गेहूँ
अंग - आँख, हृदय, हड्डियाँ तथा आत्मा
सदस्य - पिता
राशि - सिंह
सकरात्मक लक्षण - रचनात्मकता, जीवन शक्ति, नेतृत्व, आत्मविश्वास
नकारात्मक - अहंकार, निर्दयता, ईर्ष्या
जन्म कुंडली में सूर्य की अनुकूल स्थिति बेहतर स्वास्थ्य, पिता के साथ मधुर सम्बन्ध, आत्मविश्वास तथा उच्च पद का प्रतीक है। सूर्य की प्रतिकूल स्थिति इसके विपरीत फल देती है।
सूर्यनत्वाग्रहपतिंजगदुत्पत्तिकारणम्
(सूर्य जो कि ग्रहों का राजा है, जगत उत्त्पत्ति का कारक है)
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